370mm रॉकेट मोटर और 300 किमी रेंज: पिनाका-4 से भारतीय सेना को मिलेगी नई डीप-स्ट्राइक ताकत

370mm रॉकेट मोटर और 300 किमी रेंज: पिनाका-4 से भारतीय सेना को मिलेगी नई डीप-स्ट्राइक ताकत


भगवान शिव के अजेय धनुष 'पिनाक' के नाम पर बनी भारतीय सेना की स्वदेशी 'पिनाका' (Pinaka) रॉकेट प्रणाली जल्द ही दुश्मनों के खेमे में नया खौफ पैदा करने वाली है।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) अब पिनाका परिवार को एक ऐसे महा-अपग्रेड की तरफ ले जा रहा है, जो इसे सिर्फ एक टैक्टिकल हथियार से बदलकर एक रणनीतिक 'ब्रह्मास्त्र' बना देगा।

ताजा जानकारी और टेंडर दस्तावेजों से पता चला है कि भारत अब 'पिनाका-4' (Pinaka IV) विकसित कर रहा है, जिसकी मारक क्षमता 300 किलोमीटर तक होगी। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए इसमें 370mm क्लास की एक बेहद शक्तिशाली रॉकेट मोटर का इस्तेमाल किया जाएगा।

आइए बेहद आसान और बोलचाल की भाषा में समझते हैं कि पिनाका-4 में ऐसा क्या खास है जो इसे दुनिया के बेहतरीन रॉकेट सिस्टम्स की कतार में खड़ा कर देगा।

वर्तमान में इस्तेमाल होने वाले पिनाका रॉकेट्स का कैलिबर (व्यास/मोटाई) मुख्य रूप से 214mm का है (हालांकि भारत के पास अन्य छोटे रॉकेट भी हैं)। नए पिनाका-4 में इसे बढ़ाकर 370mm किया जा रहा है।

अब आप सोचेंगे कि रॉकेट की मोटाई बढ़ने से क्या होगा? दरअसल, रॉकेट का डायमीटर (व्यास) जितना ज्यादा होगा, उसका क्रॉस-सेक्शन एरिया उतना ही बढ़ जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि रॉकेट के अंदर सॉलिड ईंधन (Propellant) भरने के लिए पहले से कहीं ज्यादा जगह मिलेगी।

एक फिक्स लंबाई वाले पुराने 214mm मोटर की तुलना में 370mm का मोटर लगभग तीन गुना ज्यादा ईंधन ले जा सकता है।

ज्यादा ईंधन यानी ज्यादा ताकत और ज्यादा लंबी दूरी! हालांकि, इंजीनियर रॉकेट की लंबाई और वजन को इस तरह डिजाइन करेंगे कि यह हवा को चीरते हुए अपनी 300 किमी की अधिकतम रेंज को आसानी से हासिल कर सके।

अब तक पिनाका का इस्तेमाल युद्ध के मैदान में सेना की टुकड़ियों को तुरंत बैकअप देने या 40 से 90 किलोमीटर (Mk-1 से लेकर गाइडेड पिनाका तक) की दूरी पर मौजूद दुश्मनों को भूनने के लिए होता था।

लेकिन 300 किमी की रेंज इसे एक 'मोबाइल डीप-स्ट्राइक' (Mobile Deep Strike) ताकत बना देगी।

कल्पना कीजिए, हमारी सेना सीमा के बहुत अंदर, पूरी तरह सुरक्षित जगह पर खड़ी है। वहां से बटन दबता है और रॉकेट एलएसी (LAC) या एलओसी (LoC) पार करके दुश्मन के लॉजिस्टिक्स नोड्स (सप्लाई डिपो), कमांड पोस्ट और उनके एयर डिफेन्स सिस्टम को पल भर में राख कर देता है।

यह अमेरिका के मशहूर HIMARS (जिसमें ATACMS मिसाइल लगती है) के लेवल की मारक क्षमता है, जो भारत को रक्षा क्षेत्र में और अधिक आत्मनिर्भर बनाएगी।

रॉकेट का व्यास बढ़ने का एक और बड़ा फायदा यह है कि इसके अंदर के हिस्से में एवियोनिक्स (इलेक्ट्रॉनिक्स), नेविगेशन और कंट्रोल सिस्टम लगाने के लिए ज्यादा जगह मिल जाती है।

300 किमी दूर बैठे लक्ष्य को सटीक रूप से भेदने के लिए रॉकेट का 'स्मार्ट' होना बहुत जरूरी है। यह बड़ी जगह सुनिश्चित करेगी कि रॉकेट बिना अपने पेलोड (विस्फोटक) से समझौता किए, लक्ष्य को अचूक सटीकता (Pinpoint Accuracy) के साथ हिट करे।

चूंकि पिनाका-4 के रॉकेट पुराने रॉकेट्स की तुलना में काफी बड़े और भारी होंगे, इसलिए लॉन्चर ट्रक पर इनकी संख्या कम हो जाएगी (जैसे पुराने पिनाका में एक लॉन्चर से 12 रॉकेट दागे जाते हैं)। इसके लिए ट्रांसपोर्टेशन और फायरिंग प्लेटफॉर्म में भी बदलाव करने होंगे।

लेकिन यह कोई नुकसान नहीं है, बल्कि यह सेना को एक बेहतरीन रणनीतिक विकल्प देगा:
  • शॉर्ट रेंज पिनाका: जब दुश्मन की पैदल सेना या छावनी पर एक साथ आग बरसानी हो (Dense Salvo Fire), तो पुराने पिनाका का इस्तेमाल होगा।
  • पिनाका-4: जब दुश्मन के किसी बहुत महत्वपूर्ण और दूर स्थित ठिकाने को 100% सटीकता से उड़ाना हो, तब पिनाका-4 का कहर बरसेगा।
370mm का यह नया डायमीटर DRDO के वैज्ञानिकों को भविष्य के अपग्रेड्स के लिए भी एक खुला कैनवास देता है। अभी यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सेना इसमें लंबी दूरी तय करने के लिए अत्याधुनिक 'मल्टी-पल्स प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी' (Multi-pulse propulsion) या 'मल्टी-स्टेज डिजाइन' का इस्तेमाल करती है या नहीं।

लेकिन एक बात तय है— जब पिनाका-4 सेना में शामिल होगा, तो दुश्मन को भारतीय सीमा की तरफ आंख उठाने से पहले सौ बार सोचना पड़ेगा। 'मेक इन इंडिया' के तहत यह स्वदेशी तकनीक भारतीय सेना के तरकश का सबसे घातक तीर साबित होने वाली है।
 

हाल के रिप्लाई

लोकप्रिय लेख

Forum statistics

Threads
8,055
Messages
68,419
Members
5,786
Latest member
williumjems860
Back
Top