जब भी आसमान के सिकंदर की बात होती है, तो भारतीय वायुसेना के जांबाजों और उनके सबसे भरोसेमंद 'ब्रह्मास्त्र' यानी राफेल का नाम सीना गर्व से चौड़ा कर देता है। 4.5 जनरेशन के इस लड़ाकू विमान ने दुश्मनों के खेमे में जो खौफ पैदा किया है, वो हम सभी जानते हैं।
भारत इस वक्त 114 नए मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) खरीदने की एक बेहद अहम डील (मेगा डिफेंस डील) पर विचार कर रहा है, जिसमें फ्रांस का राफेल भी एक मजबूत दावेदार है।
इसी बीच, खुद फ्रांस से ही एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसने भारतीय रक्षा विशेषज्ञों और रणनीतिकारों को गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया है।
जनवरी 2025 में फ्रेंच इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस (Ifri) द्वारा "द फ्यूचर ऑफ एयर सुपीरियरिटी" नाम से एक रिसर्च पेपर पब्लिश हुआ। इसे फ्रेंच एयर एंड स्पेस फोर्स के लेफ्टिनेंट कर्नल एड्रियन गोरेमन्स और जीन-क्रिस्टोफ नोएल ने तैयार किया है।
इस रिपोर्ट में एक बात साफ तौर पर कही गई है जिसे जानकर आपको हैरानी होगी: जब खुद फ्रांसीसी पायलट सैन्य अभ्यासों (Joint Exercises) में असली 5वीं पीढ़ी के स्टेल्थ जेट्स (जैसे अमेरिका का F-35) का सामना करते हैं, तो वे मानते हैं कि "उनके खिलाफ जीतना बहुत मुश्किल है।"
आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं। राफेल एक 4.5 जनरेशन का विमान है, जबकि 5th जनरेशन के विमानों में 'स्टेल्थ' तकनीक होती है। स्टेल्थ यानी ऐसा विमान जिसे दुश्मन का रडार आसानी से पकड़ न सके।
फ्रेंच एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब किसी साझा युद्ध में 4.5 जनरेशन (राफेल) और 5th जनरेशन (F-35) एक साथ लड़ते हैं, तो राफेल को 'सहायक' (Auxiliary) भूमिका निभानी पड़ती है, जबकि मुख्य हमला 5th जनरेशन के विमान करते हैं। इसे वे "टू-स्पीड कोएलिशन" (दो रफ्तार वाला गठबंधन) कहते हैं।
यह कोई दुश्मन का प्रोपेगैंडा नहीं है, बल्कि खुद राफेल बनाने वाले देश के सैन्य अधिकारियों का सच है!
अब आप सोचेंगे कि क्या भारत को चिंता करनी चाहिए? खासकर तब जब चीन के पास उसका अपना 5th-Gen फाइटर जेट चेंगदू J-20 (Mighty Dragon) मौजूद है।
यहीं पर भारतीय वायुसेना का आत्मविश्वास और अनुभव काम आता है।
जब भारत में राफेल की एंट्री हुई थी, तब बौखलाए चीन ने तुरंत अपने चार J-20 लड़ाकू विमानों को गलवान के पास तैनात कर दिया था। पूर्व वायुसेना प्रमुख आर.के.एस. भदौरिया ने इसे ड्रैगन की घबराहट का सीधा सबूत बताया था।
हमारे एयर मार्शल (रिटायर्ड) अनिल चोपड़ा जैसे दिग्गज सैन्य रणनीतिकार हमेशा चीन के J-20 पर सवाल उठाते रहे हैं। और यह ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस से भी साबित होता है:
- इंजन का झोल: चीन का J-20 देखने में विशाल है, लेकिन इसका इंजन (WS-15) आज भी तकनीकी समस्याओं से जूझ रहा है। यह बिना आफ्टरबर्नर के सुपरसोनिक स्पीड (सुपरक्रूज़) बनाए रखने में संघर्ष करता है।
- अनुभव की कमी: राफेल ने अफगानिस्तान, लीबिया, माली और सीरिया में असली युद्ध लड़े हैं। इसके पास 25 सालों का युद्ध का तजुर्बा है, और इसकी घातक 'मीटियोर' (Meteor) मिसाइल से बचने का कोई तरीका फिलहाल चीन या पाकिस्तान के पास नहीं है। वहीं J-20 ने आज तक कोई असली युद्ध नहीं लड़ा है। यह एक 'बिना परखा हुआ' विमान है।
लेकिन, भारत का सामना जिस चीनी J-20 से है, उसकी 'स्टेल्थ' कोटिंग और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर क्षमता अभी भी संदिग्ध है। पश्चिमी विशेषज्ञ भी मानते हैं कि J-20 पूरी तरह से मैच्योर 5वीं पीढ़ी का विमान नहीं है। इसलिए, राफेल आज के समय में चीनी बेड़े पर भारी पड़ सकता है।
भविष्य की सुरक्षा केवल इस उम्मीद पर नहीं टिकाई जा सकती कि चीन की तकनीक हमेशा 'कमजोर' ही रहेगी। वो लगातार इसे सुधार रहे हैं।
फ्रांस की 'डसॉल्ट एविएशन' इस हकीकत को जानती है। इसीलिए वह भारत को राफेल के पुराने मॉडल नहीं, बल्कि F4+ और F5 जैसे उन्नत वेरिएंट ऑफर कर रही है। डसॉल्ट इन्हें सिर्फ रडार से छुपने वाले (Stealth) विमानों के तौर पर नहीं बेच रही, बल्कि "फ्लाइंग कमांड सेंटर" के रूप में पेश कर रही है।
इसे ऐसे समझिए कि भविष्य का राफेल हवा में अकेला नहीं उड़ेगा। इसके साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से चलने वाले 'लॉयल विंगमैन' (Loyal Wingman) ड्रोन उड़ेंगे।
ये ड्रोन राफेल के इशारे पर आगे जाकर दुश्मन के रडार को चकमा देंगे, जानकारी जुटाएंगे और जरूरत पड़ने पर दुश्मन पर मिसाइल भी दागेंगे। पायलट सुरक्षित पीछे रहकर इस पूरे झुंड को कमांड करेगा।
देश का डिफेंस (Defence) सिस्टम भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर ही मजबूत बनाया जाता है।
भारतीय वायुसेना के रणनीतिकारों के सामने अब यह चुनौती है कि क्या फ्रांस का यह 'लॉयल विंगमैन' और 'सेंसर फ्यूजन' वाला नया राफेल उस तकनीकी गैप को भर पाएगा, जिसका जिक्र खुद फ्रांसीसी पायलट कर रहे हैं?
भारत को 114 जेट्स की इस मेगा डिफेंस डील पर मुहर लगाने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि हम जो तकनीक खरीद रहे हैं, वह न केवल आज के J-20 को धूल चटाने में सक्षम हो, बल्कि आने वाले दशकों तक भारतीय आसमान की अभेद्य दीवार बनी रहे।
इसके साथ ही, भारत को अपने स्वदेशी 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट AMCA के प्रोजेक्ट में भी युद्ध स्तर पर तेजी लानी होगी, क्योंकि अंततः आत्मनिर्भरता ही सबसे बड़ी ढाल है! जय हिंद।