तेजस Mk1A जेट के लिए GE ने HAL को सौंपे तीन और F404 इंजन

तेजस Mk1A जेट के लिए GE ने HAL को सौंपे तीन और F404 इंजन


भारतीय वायुसेना (IAF) की स्वदेशी गर्जना को और तेज करने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका की जानी-मानी एविएशन कंपनी GE एयरोस्पेस ने अगस्त 2026 में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को तीन नए F404-IN20 इंजन सौंप दिए हैं।

ये इंजन भारत के महाबली 'तेजस Mk1A' (LCA Tejas Mk1A) लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट की धड़कन बनेंगे।

आपको बता दें कि इंजन सप्लाई में देरी के कारण तेजस Mk1A प्रोजेक्ट की रफ्तार थोड़ी धीमी हो गई थी।

लेकिन नया और आत्मनिर्भर भारत अब किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं करता! HAL ने देरी के चलते कॉन्ट्रैक्ट के नियमों के तहत GE एयरोस्पेस पर जुर्माना (Liquidated Damages) भी लगाया है।

HAL के पूर्व चेयरमैन डीके सुनील ने अप्रैल में ही स्पष्ट कर दिया था कि GE ने जून से दिसंबर 2026 के बीच 20 इंजन देने का वादा किया है।

आसान भाषा में समझें तो फाइटर जेट का इंजन उसका दिल होता है, और तेजस का यह 'दिल' बेहद खास है।

GE ने इस इंजन को खास तौर पर भारत के सिंगल-इंजन वाले तेजस के लिए ही कस्टमाइज़ किया है।

F404 सीरीज मिलिट्री एविएशन के इतिहास के सबसे भरोसेमंद इंजनों में से एक मानी जाती है। तेजस में लगने वाला IN20 वेरिएंट इस पूरे F404 परिवार का सबसे ताकतवर इंजन है, जो करीब 84 किलोन्यूटन (kN) का थ्रस्ट पैदा करता है।

इसमें ज्यादा हवा खींचने वाला फैन और खास सिंगल-क्रिस्टल टरबाइन ब्लेड्स लगे हैं। ये ब्लेड्स इस तरह डिज़ाइन किए गए हैं कि इंजन अत्यधिक तापमान और दबाव में भी मक्खन की तरह काम करता रहे।

तेजस Mk1A केवल एक फाइटर जेट नहीं, बल्कि 4.5 पीढ़ी (4.5 Gen) का एक उड़ता हुआ किला है।

यह केवल अमेरिकी इंजन पर निर्भर नहीं है, बल्कि इसके अंदर भारत की कई स्वदेशी और घातक तकनीकें लगी हैं:
  • 'उत्तम' AESA रडार: यह जेट का 'डिजिटल दिमाग' और आंखें हैं। जहां पुराने मैकेनिकल रडार एक बार में एक ही दिशा में देखते थे, वहीं एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे (AESA) रडार एक साथ 50 से ज्यादा दुश्मनों को ट्रैक कर सकता है और एक साथ कई निशानों को तबाह करने की क्षमता रखता है।
  • अस्त्र मिसाइल (Astra Mk1): यह भारत की अपनी स्वदेशी 'बियॉन्ड विजुअल रेंज' (BVR) मिसाइल है। इसका मतलब है कि दुश्मन आंखों से दिखे या न दिखे, यह जेट 110 किलोमीटर दूर से ही उसके परखच्चे उड़ा सकता है।
  • एडवांस्ड EW सूट (इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर): यह एक ऐसा डिजिटल सुरक्षा कवच है जो दुश्मन के रडार को चकमा दे सकता है या जाम कर सकता है। आसान शब्दों में कहें तो यह जेट आसमान में दुश्मन के लिए 'अदृश्य' जैसी स्थिति पैदा कर सकता है।
  • हवा में ईंधन (In-Flight Refuelling): हवा में ही उड़ते-उड़ते ईंधन भरने की क्षमता ने इस हल्के लड़ाकू विमान की पहुंच (Range) को बहुत बढ़ा दिया है, जिससे यह लंबी दूरी के मिशन आसानी से कर सकता है।
GE एयरोस्पेस और HAL का यह साथ नया नहीं है। दोनों पिछले 40 सालों से भारत के डिफेंस सेक्टर को मजबूत कर रहे हैं।

याद हो कि 2016 तक GE ने पुराने तेजस मॉडल के लिए 65 इंजन दिए थे और फिर अतिरिक्त ऑर्डर न होने के कारण प्रोडक्शन लाइन बंद कर दी गई थी।

लेकिन 2021 में तेजस Mk1A के लिए 99 इंजनों की 5,375 करोड़ रुपये की महा-डील के बाद, GE को 5 साल से बंद पड़ी अपनी फैक्ट्री दोबारा चालू करनी पड़ी और अपनी ग्लोबल सप्लाई चेन को फिर से जगाना पड़ा।

अब तक भारतीय वायुसेना ने 180 तेजस Mk1A जेट्स का ऑर्डर दिया है। HAL की प्रोडक्शन लाइन अब जेट्स बनाने के लिए पूरी तरह तैयार खड़ी है।

जैसे-जैसे अमेरिका से ये F404 इंजन भारत आते जाएंगे, वैसे-वैसे हमारी वायुसेना के बेड़े में ये स्वदेशी महाबली जुड़ते जाएंगे। यह घटनाक्रम केवल एक इंजन की डिलीवरी नहीं है, बल्कि आसमान में भारत की बढ़ती सैन्य आत्मनिर्भरता की एक नई उड़ान है!
 

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