क्या आपने कभी सोचा है कि जब हमारी भारतीय वायुसेना (IAF) आसमान में उड़ान भरती है, तो उनका स्वैग कैसा होता है?
मिलिट्री ऑपरेशन्स आमतौर पर बेहद गंभीर और तकनीकी होते हैं, लेकिन हाल ही में आसमान में कुछ ऐसा हुआ जिसने बॉलीवुड के रोमांच और वायुसेना के पराक्रम को एक ही धागे में पिरो दिया।
हाल ही में नई दिल्ली के पश्चिमी हिस्से में उड़ान भरते हुए भारतीय वायुसेना के दो An-32 (एंटोनोव-32) परिवहन विमानों को ट्रैक किया गया।
एविएशन और डिफेंस पर नज़र रखने वाले ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) ट्रैकर 'BlackJack! (@B777200F)' ने जब इन विमानों के ट्रांसपोंडर डेटा पर गौर किया, तो एक बेहद दिलचस्प बात सामने आई।
इन दोनों विमानों के 'कॉलसाइन' थे— 'रिजवान' (Rizwan) और 'हमजा' (Hamza)।
अब जो लोग स्पाई-थ्रिलर फिल्मों के दीवाने हैं, उनके दिमाग की बत्ती तुरंत जल गई होगी। जी हां, ये नाम आदित्य धर के निर्देशन में बनी ब्लॉकबस्टर स्पाई-थ्रिलर फ्रैंचाइजी 'धुरंधर' के मशहूर किरदारों के हैं।
फिल्म में सुपरस्टार रणवीर सिंह ने 'हमजा अली मजारी' और मशहूर फिटनेस ट्रेनर से अभिनेता बने मुस्तफा अहमद ने 'रिजवान' का शानदार किरदार निभाया था।
कहानी में ये दोनों खूंखार अंडरकवर R&AW (रॉ) एजेंट थे, जो पाकिस्तान के कराची (विशेषकर लिय्यारी इलाके) में अंडरवर्ल्ड के बीच घुसपैठ करके दुश्मनों की नाक में दम कर देते हैं।
फिल्म के सीक्वल 'धुरंधर: द रिवेंज' के बाद इन किरदारों का क्रेज इतना जबरदस्त है कि खुद मुस्तफा अहमद बता चुके हैं कि उनके फैंस आज भी उन्हें 'रिजवान' कहकर बुलाते हैं।
और अब, वायुसेना के पायलटों द्वारा इन कॉलसाइन्स का इस्तेमाल करना इस बात का सबूत है कि हमारी सेना भी देशभक्ति से लबरेज इन सिनेमाई किरदारों से अछूती नहीं है।
जानकारी के मुताबिक, उड़ान भरने के बाद इन विमानों को कहां लैंड करना था, इसकी कोई सार्वजनिक जानकारी नहीं थी।
यह संभवतः वायुसेना की एक नियमित ट्रेनिंग उड़ान (Training Sortie) का हिस्सा था।
लेकिन दो विमानों का एक साथ, एक खुफिया जासूसों की जोड़ी वाले कॉलसाइन के साथ मिशन पर निकलना, इस रूटीन उड़ान को भी बेहद खास और रोमांचक बना गया।
चलिए अब थोड़ी बात मिलिट्री टेक्नोलॉजी की कर लेते हैं। An-32 कोई साधारण हवाई जहाज नहीं है। सोवियत युग में बना यह विमान 1980 के दशक से भारतीय वायुसेना का एक भरोसेमंद 'वर्कहॉर्स' रहा है।
इसे विशेष रूप से ऐसे डिजाइन किया गया है कि इसके इंजनों की ताकत सामान्य विमानों से कहीं ज्यादा (High Thrust-to-Weight Ratio) होती है।
इसका सीधा सा मतलब यह है कि यह विमान लद्दाख, सियाचिन या अरुणाचल प्रदेश जैसी अत्यधिक ऊंचाई और दुर्गम पहाड़ियों वाले छोटे और कच्चे रनवे से भी भारी-भरकम साजो-सामान और सैनिकों को लेकर आसानी से उड़ान भर सकता है।
जब भी सरहदों पर लॉजिस्टिक्स या सैनिकों को जल्द से जल्द पहुंचाने की बात आती है, An-32 सबसे आगे खड़ा मिलता है।
हालांकि, अब यह बेड़ा पुराना हो रहा है और हमारी डिफेंस फोर्सेज आधुनिकीकरण की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही हैं।
अतिरिक्त जानकारी के लिए बता दें कि सरकार इन पुराने An-32 विमानों को रिप्लेस करने के लिए स्पेन के Airbus C-295 (जिन्हें अब टाटा के साथ मिलकर भारत में ही बनाया जा रहा है) और ब्राजील के C-390 Millennium जैसे अत्याधुनिक ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट पर विचार कर रही है।
नए विमान ज्यादा पेलोड, आधुनिक एवियोनिक्स और बेहतर तकनीक से लैस होंगे।
लेकिन जब तक ये नए 'सिकंदर' पूरी तरह से आसमान पर राज नहीं कर लेते, तब तक हमारे पुराने और भरोसेमंद An-32 विमान यूं ही आसमान का सीना चीरते रहेंगे।
और अगर वह उड़ान 'हमजा' और 'रिजवान' जैसे कॉलसाइन के साथ हो, तो दुश्मनों के खेमे में हलचल मचना तो तय है!